in

तुम्हारे हर राज की हमराज बन जाना चाहती हूँ ,

तुम्हारे हर राज की हमराज बन जाना चाहती हूँ ,
तुम्हारी आँखो के ख्याब बन जाना चाहती हूँ मै,
तुम्हारे कदमो की आहट बन जाना चाहती हूँ मै,
तुम्हारे दिल का हर अहसास हो जाना चाहती हूँ मै,
तुम्हारे मन का विश्वास  बन जाना चाहती हूँ…!

इस कदर हम यार को मनाने निकले!

कुछ इस तरह मशरूफ रहते हैं